नई दिल्ली | संसद
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को संसद में हुए घटनाक्रम को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि बुधवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित स्पीच के दौरान कोई अप्रत्याशित घटना हो सकती थी, इसी आशंका के चलते पीएम का भाषण टालने का फैसला लिया गया।
ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा स्थिति को देखते हुए उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री से सदन में न आने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि सदन की कार्यवाही और प्रधानमंत्री की सुरक्षा सर्वोपरि है।
न्यूज़ एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा पीएम के भाषण के दौरान किसी प्रकार के हमले की योजना बनाए जाने की आशंका जताई गई थी। इसी इनपुट के बाद लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 5 फरवरी की शाम 5 बजे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था, लेकिन उस दौरान विपक्षी महिला सांसदों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही पहले ही अगले दिन तक स्थगित कर दी गई थी। इसके चलते पीएम का संबोधन नहीं हो सका।
हालांकि, भारी हंगामे के बीच गुरुवार को धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि साल 2004 के बाद यह पहला अवसर है, जब लोकसभा में प्रधानमंत्री के भाषण के बिना धन्यवाद प्रस्ताव पारित हुआ।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय में जो दृश्य देखने को मिले, वे सदन के इतिहास में पहले कभी नहीं देखे गए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देने वाले थे, तब विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री की सीट के पास तक पहुंच गए, जिससे स्थिति असामान्य हो गई।
बिरला ने विपक्षी सांसदों को चेतावनी देते हुए कहा कि पोस्टर और नारेबाजी के साथ सदन नहीं चल सकता। उन्होंने कहा कि जिस तरह से महिला सदस्य प्रधानमंत्री की सीट तक पहुंचीं, वह न तो उचित था और न ही सदन की गरिमा के अनुरूप।
लगातार हो रहे हंगामे को देखते हुए लोकसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी।