नई दिल्ली। भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) ने मंगलवार को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर कर दिए। इसे अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता माना जा रहा है। यह डील न सिर्फ भारत-EU संबंधों को नई ऊँचाई देती है, बल्कि वैश्विक व्यापार की दिशा में भी एक अहम मोड़ के तौर पर देखी जा रही है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के जरिए लगभग दो अरब लोगों के लिए एक विशाल फ्री-ट्रेड क्षेत्र तैयार होगा, जिससे दोनों पक्षों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलेगा।
भारत और EU के बीच यह समझौता करीब 20 वर्षों की लंबी बातचीत के बाद संभव हो पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वैश्विक हालात, खासतौर पर अमेरिका की आक्रामक टैरिफ नीतियों ने इस डील को अंतिम रूप देने में भूमिका निभाई।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इस समझौते को अहम माना जा रहा है। ब्लूमबर्ग ने लिखा है कि यह डील अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की व्यापार नीतियों के बीच यूरोप और भारत का एक मजबूत रणनीतिक जवाब है, जो मुक्त व्यापार के पक्ष में स्पष्ट संदेश देता है।
अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका की वैश्विक भूमिका और पुराने गठबंधनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। साथ ही चीन के सस्ते उत्पादों से वैश्विक बाजारों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने यूरोप और भारत को करीब आने के लिए प्रेरित किया है।
विश्लेषकों का कहना है कि भारत और EU दोनों ही अब अपने व्यापारिक विकल्पों को विविध बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, ताकि किसी एक देश या बाजार पर निर्भरता कम की जा सके।
इस ऐतिहासिक समझौते के दौरान यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा नई दिल्ली में मौजूद थे। दोनों नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। इसी यात्रा के दौरान भारत-EU FTA को लेकर अंतिम सहमति बनी।
FTA के लागू होने से व्यापार, निवेश, रोजगार और तकनीकी सहयोग के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि यह समझौता भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में और मजबूत स्थिति दिला सकता है, वहीं यूरोप को एक भरोसेमंद और तेजी से बढ़ता बाजार मिलेगा।