गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं केंद्रीय गृह तथा सहकारिता मंत्री श्री अमितभाई शाह आज अडालज में श्री स्वामिनारायण भगवान द्वारा स्वहस्ते लिखित “शिक्षापत्री” ग्रंथ के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘समैया’ महोत्सव में सहभागी बने। इस अवसर पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री श्री हर्षभाई संघवी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री अमितभाई शाह ने कहा कि गुजरात भगवान स्वामिनारायण की कर्मभूमि है और एक प्रकार से तप की भूमि भी है। उत्तर प्रदेश के छपैया में जन्मे भगवान स्वामिनारायण ने पूरे देश में भ्रमण कर अंततः गुजरात को अपनी कर्मभूमि बनाया और अंग्रेजी शासन के दौरान कुरीतियों व नशे की गिरफ्त में फंसे समाज को सच्चे धर्म का मार्ग दिखाकर संगठित करने का महान कार्य किया।

श्री शाह ने कहा कि भगवान स्वामिनारायण के अनेक योगदानों में सबसे बड़ा योगदान “शिक्षापत्री” का प्राकट्य है। वेद, पुराण, उपनिषद, ब्राह्मण ग्रंथ, रामानंदी एवं पुष्टिमार्गी साहित्य सहित हिंदू धर्म के विविध शास्त्रों का गहन अध्ययन कर, हजारों संतों से संवाद के बाद केवल लगभग 200 श्लोकों में जीवन को सुचारु बनाने वाला यह अनुपम ग्रंथ रचा गया। शिक्षापत्री ने धर्म, ज्ञान, वैराग्य, भक्ति और व्यवहार—इन सभी तत्वों को सरल और व्यावहारिक रूप में समाज के सामने रखा।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षापत्री का अध्ययन केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि अपने जीवन को व्यवस्थित, नैतिक और विवादमुक्त बनाने के लिए करें। 212 श्लोकों में समाहित यह ग्रंथ व्यक्ति के चरित्र, सामाजिक मर्यादा, सेवा, संयम, करुणा, अहिंसा और कर्तव्यबोध के लिए स्पष्ट दिशा प्रदान करता है। “सर्वजन हिताय” ही शिक्षापत्री का मूल संदेश है।

पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए श्री शाह ने कहा कि मानव जीवन को लंबा करना है तो पृथ्वी के जीवन को भी सुरक्षित रखना होगा। वृक्षारोपण, शून्य प्लास्टिक उपयोग और सौर ऊर्जा जैसे अभियानों को इस महोत्सव से जोड़कर समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए उन्होंने महंतों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने यह भी कहा कि स्वामिनारायण संप्रदाय ने गोरक्षा, वेदशालाओं, पंचदेव मंदिरों और सनातन वैदिक मूल्यों की रक्षा में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। बालिकाओं की हत्या जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ अभियान, शिक्षा पर बल, पशु बलि पर रोक, जातिवाद और छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध संघर्ष भगवान स्वामिनारायण की दूरदर्शिता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए श्री शाह ने कहा कि वर्षों तक सनातन धर्म के अनुयायी एक ऐसे शासन की प्रतीक्षा कर रहे थे जो सनातन परंपरा का सम्मान करे। राम मंदिर का निर्माण उस प्रतीक्षा का सफल अंत है। अनुच्छेद 370 हटाना, समान नागरिक संहिता की दिशा में कदम, योग, आयुर्वेद, गौसेवा और धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार जैसे निर्णय मजबूत नेतृत्व का प्रमाण हैं। उन्होंने विश्वासपूर्वक कहा कि अब देश में कभी भी ऐसा शासन नहीं आएगा जो सनातन धर्म के अनुयायियों को निराश करे।

इस अवसर पर श्री व्रजेंद्र प्रसाद (लालजी) महाराज द्वारा किए गए भव्य आयोजन के लिए केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने सार्वजनिक मंच से उनका सम्मान किया।

कार्यक्रम में राज्य मंत्री श्री जीतुभाई वाघाणी, पूर्व मंत्री श्री भूपेंद्रसिंह चुडासमा, कर्णावती महानगर भाजपा अध्यक्ष श्री प्रेरकभाई शाह, मुख्य महाराज श्री कौशलप्रसादजी आचार्यश्री, श्री व्रजेंद्र प्रसाद (लालजी) महाराजश्री, संतगण, हरिभक्त एवं बड़ी संख्या में सत्संगी उपस्थित रहे।