डॉ. महेंद्र मधुप: एक व्यक्ति नहीं, एक छत्रछाया (जन्मदिन पर विशेष)
राजस्थान की धरती पर जब पत्रकारिता केवल खबरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि समाज के प्रति एक गहरी जिम्मेदारी मानी जाती थी, उसी दौर में एक नाम चुपचाप अपनी दिशा तय कर रहा था — डॉ. महेंद्र मधुप।
बहुत कम उम्र में उन्होंने कलम उठाई और फिर उसे कभी रखा नहीं। उनके लिए पत्रकारिता महज़ एक पेशा नहीं रही, बल्कि किसानों की आवाज़ बनना उनका उद्देश्य बन गया। खेत-खलिहानों की समस्याएँ, किसानों के संघर्ष, उनके नवाचार और उनकी चुप्पी — इन सबको शब्द देने का काम उन्होंने निरंतर किया।
उन्हें यूँ ही कृषि पत्रकारिता का “भीष्म पितामह” नहीं कहा जाता। राजस्थान की पत्रकारिता में पहली पीएचडी हासिल कर उन्होंने न केवल शैक्षणिक उपलब्धि दर्ज की, बल्कि पत्रकारिता को एक नई दृष्टि भी दी। उनका लेखन शोधपरक, संवेदनशील और जमीन से जुड़ा रहा है।
“मिशन फार्मर साइंटिस्ट” उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक ऐसा परिवार है जो देशभर में फैला हुआ है। रसायन मुक्त और ज़हर मुक्त खेती की दिशा में काम करने वाले किसानों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य डॉ. मधुप ने किया। उन्होंने विचार से विचार को, किसान से किसान को और पीढ़ी से पीढ़ी को जोड़ा।
व्यक्तिगत जीवन में भी उनका स्नेह और मार्गदर्शन अनेक लोगों के लिए प्रेरणा बना है। कभी पिता की तरह समझाने वाले, कभी गुरु की तरह दिशा देने वाले, तो कभी बड़े भाई की तरह साथ खड़े रहने वाले — उनका व्यक्तित्व बहुआयामी है। उनकी डांट में भी आगे बढ़ाने की भावना ही छिपी होती है।
दो मार्च का दिन केवल उनका जन्मदिन नहीं, बल्कि उन सभी के लिए एक विशेष दिन है जिन्होंने उनसे कुछ सीखा है। संवाद, विचार और मिट्टी की खुशबू से भरे उनके शब्दों ने न जाने कितने “मिट्टी के महानायकों” को पहचान दिलाई है।
“अखंड संवाद” जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में उनका साथ और आशीर्वाद हमेशा प्रेरक रहा है। उनके विश्वास और आशीष ने कई कीर्तिमानों की राह को संभव बनाया है।
आज उनके जन्मदिन पर यही कहना उचित है कि कुछ लोग पेड़ की तरह होते हैं — जो स्वयं धूप में खड़े रहते हैं और दूसरों को छाया देते हैं। डॉ. महेंद्र मधुप ऐसी ही एक छत्रछाया हैं।
मिट्टी से जुड़े, विचारों से दृढ़ और संस्कारों से समर्पित — वे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बने रहें, यही कामना है।
🌾 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ,आप यूँ हीकिसानों की आवाज़ बने रहें,और हम जैसे पत्रकारों के लिएएक छत्रछाया बने रहें।🌾

प्रणाम।-

सुनील सुशीला शर्मा