बनासकांठा जिले के धानेरा स्थित लाल चौक पर राष्ट्रीय किसान संगठन के तत्वावधान में आयोजित किसान महापंचायत ने एक बार फिर किसानों की गंभीर समस्याओं को सरकार के सामने मजबूती से रखा। बड़ी संख्या में जुटे किसानों ने गैर-उत्पादित तंबाकू पर लगाए गए भारी टैक्स और फसल बर्बादी के मुआवजे में कथित भेदभाव के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया।

महापंचायत में शामिल किसानों के हाथों में बैनर और तख्तियाँ थीं, जिन पर उनकी मांगें और नाराजगी साफ झलक रही थी। नारेबाजी करते हुए किसान रैली के रूप में धानेरा नायब कलेक्टर कार्यालय पहुँचे, जहाँ उन्होंने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस आयोजन ने यह संकेत दे दिया कि किसान अब अपनी समस्याओं को लेकर चुप बैठने को तैयार नहीं हैं।

किसानों का मुख्य आक्रोश सरकार द्वारा गैर-उत्पादित तंबाकू पर लगाए गए लगभग 65 प्रतिशत टैक्स को लेकर है। किसानों का कहना है कि तंबाकू की फसल खेतों में तैयार खड़ी है और जल्द ही इसे बाजार में लाया जाएगा। ऐसे समय में इतना अधिक टैक्स लगाए जाने से व्यापारियों पर दबाव पड़ेगा, जिसका सीधा असर किसानों को मिलने वाले दामों पर पड़ेगा।
किसानों का तर्क है कि टैक्स के कारण उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तक नहीं मिल पाएगा, जिससे उनकी मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिर जाएगा। इसलिए सरकार को यह टैक्स तुरंत वापस लेना चाहिए।

महापंचायत में मानसून के दौरान हुई भारी बारिश से हुए नुकसान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। किसानों ने आरोप लगाया कि फसल और जमीन को हुए भारी नुकसान के बावजूद मुआवजा वितरण में गंभीर अनियमितताएँ हुई हैं। कई वास्तविक प्रभावित किसानों को पूरी सहायता नहीं मिली, जबकि री-सर्वे की प्रक्रिया भी औपचारिकता बनकर रह गई है।

किसानों का कहना है कि खेत बह जाने और फसल नष्ट होने के बावजूद सरकार की ओर से राहत पर्याप्त नहीं है। री-सर्वे के लिए दिए गए कई आवेदन महीनों से लंबित पड़े हैं, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर होती जा रही है।

महापंचायत को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक नाथाभाई पटेल और किसान नेता कालुभाई तरक ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इसका असर केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी।

बैठक के अंत में किसानों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने तंबाकू टैक्स वापस नहीं लिया, री-सर्वे के लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा नहीं किया और फसल नुकसान का उचित मुआवजा नहीं दिया, तो आने वाले समय में किसान उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

धानेरा की यह किसान महापंचायत केवल स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि उस गहराते असंतोष का संकेत है, जो आज खेती-किसानी से जुड़े बड़े वर्ग में पनप रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेती है।