जयपुर। किसान के सम्मान और धरती के स्वाभिमान की सच्ची कहानियों को सामने लाने वाले कार्यक्रम मिट्टी के महानायक में इस बार महानायक बने — नवल डागा और उनकी जीवन संगिनी शारदा डागा।

यह एपिसोड केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उस विचारधारा का दस्तावेज़ है, जिसने 40 वर्षों की निरंतर साधना से एक घर को पर्यावरण चेतना के जीवंत संग्रहालय में बदल दिया।

40 वर्षों की साधना, एक मिशन

राजस्थान की तपती जलवायु के बीच जयपुर में स्थित नवल डागा का घर आधुनिक उपभोक्तावाद के विपरीत एक वैचारिक प्रतिरोध की तरह खड़ा है। यहाँ एसी की ठंडक से अधिक महत्व प्राकृतिक वेंटिलेशन, वर्षा जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और पर्यावरण संदेशों को दिया गया है।

घर की सैकड़ों टाइल्स पर अंकित पर्यावरण संदेश, वृक्षारोपण के संकल्प, और दैनिक जीवन में प्रकृति के अनुकूल व्यवहार—यह सब मिलकर इस घर को “इको-लिविंग मॉडल” के रूप में स्थापित करता है।

मिट्टी से ग़ज़ल लिखने वाले अनसुने नायकमिट्टी के महानायक ऐसे ही अनदेखे और अनसुने व्यक्तित्वों को मंच देता है, जो बिना प्रचार के समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं।

इस कड़ी में कार्यक्रम के होस्ट, डायरेक्टर और स्टोरी टेलर सुनील सुशीला शर्मा स्वयं जयपुर पहुँचे। उनका उद्देश्य स्पष्ट था—ऐसी जीवनशैली को देश के सामने लाना, जो केवल पर्यावरण की बात नहीं करती, बल्कि उसे जीती है।

कैमरे ने जब इस घर के हर कोने को रिकॉर्ड किया, तो यह स्पष्ट हो गया कि यह मकान नहीं, एक आंदोलन है—जो कहता है, “हवा खरीदो मत… उगाओ।”

शारदा डागा: संदेश बन चुकी जीवनशैली

इस पहल की समान भागीदार शारदा डागा हर सामाजिक और सार्वजनिक मंच पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती हैं। उनके वस्त्रों से लेकर सार्वजनिक उपस्थिति तक, हर जगह प्रकृति के प्रति प्रतिबद्धता झलकती है।

दोनों ने मिलकर यह साबित किया है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि व्यक्तिगत संकल्प का परिणाम भी हो सकता है।

प्रेरणा का संदेश

मिट्टी के महानायक का यह एपिसोड दर्शकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। यह कहानी बताती है कि परिवर्तन की शुरुआत घर से हो सकती है, यदि सोच में स्थिरता और संकल्प में निरंतरता हो।

नवल डागा और शारदा डागा ने अपने जीवन से यह सिद्ध कर दिया कि यदि इरादा मजबूत हो, तो एक घर भी पर्यावरण क्रांति का केंद्र बन सकता है।

(वेब डेस्क | मिट्टी के महानायक _ अनंत भारत )