राजस्थान के सीकर के पास स्थित एक साधारण-सा खेत इन दिनों खास चर्चा में है। इस सप्ताह के लोकप्रिय कार्यक्रम “मिट्टी के महानायक” में प्रगतिशील किसान कान सिंह निर्वाण को चुना गया है, जिन्होंने अपने खेत “जोर की ढाणी” को रसायन मुक्त खेती, इंटीग्रेटेड फार्मिंग और एग्रो टूरिज्म का सफल मॉडल बना दिया है।
यह कार्यक्रम प्रसिद्ध कृषि एवं पर्यावरण पत्रकार सुनील सुशीला शर्मा द्वारा होस्ट किया जाता है, जो हर सप्ताह ऐसे जमीनी नायकों को मंच देते हैं, जो खामोशी से मिट्टी के लिए काम कर रहे हैं और खेती को नई पहचान दे रहे हैं।
“जोर की ढाणी” – खेत जो बना सुकून की मंज़िल
सीकर के समीप स्थित यह खेत आज गौ धाम, इनोवेशन हाउस और एग्रो टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में पहचाना जाता है।
मिट्टी के पारंपरिक कच्चे घर, राजस्थानी संस्कृति की झलक, गौ आधारित जीवनशैली, खेतों की हरियाली, प्राकृतिक चूल्हे की रोटियां और खेत में उगी ताजी सब्जियां — यह सब मिलकर यहां आने वालों को गांव का वास्तविक अनुभव कराते हैं।
देश-विदेश से लोग यहां शांति और प्रकृति के बीच समय बिताने पहुंचते हैं।
यह कोई फाइव-स्टार रिसॉर्ट नहीं है —
लेकिन यहां रात के आसमान में अनगिनत तारे दिखते हैं।
यहां LED की चकाचौंध नहीं, बल्कि जुगनुओं की टिमटिमाहट है।
ना प्रदूषण, ना शोर — केवल शुद्ध हवा और प्रकृति का सान्निध्य।
इस पूरी परिकल्पना को कान सिंह निर्वाण और उनकी पत्नी सुशीला राठौर ने मिलकर साकार किया है।
रसायन मुक्त खेती और इंटीग्रेटेड फार्मिंग का मॉडल
कान सिंह निर्वाण पिछले कई वर्षों से रसायन मुक्त खेती कर रहे हैं। उनका मानना है कि मिट्टी को जीवित रखना ही असली समृद्धि है।
उनके खेत की सबसे बड़ी विशेषता है इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल, जिसमें शामिल हैं:
- फलों के पेड़
- देसी गायें
- घोड़े
- भेड़-बकरियां
- बतख और खरगोश
उनका मानना है कि पर्यावरण संतुलन के लिए हर जीव आवश्यक है।
यह मॉडल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ आय के विविध स्रोत भी तैयार करता है।
खेती बना नया ट्रेंड: एग्रो टूरिज्म से बढ़ी आमदनी
अब इस परिवार की अगली पीढ़ी भी पढ़ाई पूरी कर खेतों को समर्पित हो चुकी है।
कान सिंह निर्वाण का स्पष्ट संदेश है:
“खेती से खूबसूरत कोई स्वैग नहीं, और एग्रो टूरिज्म से बड़ा कोई ट्रेंड नहीं।”
इस एपिसोड को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है। कई किसान यह जानकर उत्साहित हैं कि खेत को टूरिस्ट सेंटर में बदलकर भी आय बढ़ाई जा सकती है।
“मिट्टी के महानायक” – मिट्टी के हीरोज को मंच
“मिट्टी के महानायक” कार्यक्रम के माध्यम से सुनील सुशीला शर्मा उन किसानों और पर्यावरण योद्धाओं को राष्ट्रीय मंच दे रहे हैं, जो चुपचाप मिट्टी को बचाने और खेती को सम्मान दिलाने में जुटे हैं।
मिट्टी को समर्पित इन हीरोज को पहचान दिलाने का यह प्रयास अब रंग ला रहा है और देशभर में प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।