वापी (गुजरात): रिहायशी इलाके में स्थित स्क्रैप गोदामों में देर रात लगी भीषण आग ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। करीब 35 से 40 गोदाम एक साथ आग की चपेट में आ गए और देखते ही देखते पूरा इलाका आग की लपटों में घिर गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रात करीब डेढ़ से 2 बजे के बीच अचानक आग भड़क उठी। तेज धमाकों और उठती लपटों ने लोगों को गहरी नींद से जगा दिया। घबराए लोग अपने बच्चों को लेकर घरों से बाहर भागे, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं हर साल सामने आती हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि यह महज एक हादसा है या फिर किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा।
सूत्रों के अनुसार, इन गोदामों में प्लास्टिक कचरा, केमिकल युक्त ड्रम, मेडिकल वेस्ट और अन्य ज्वलनशील पदार्थ भारी मात्रा में जमा थे, जिसके चलते आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया।
आग इतनी भयंकर थी कि दमकल विभाग को ‘मेजर कॉल’ घोषित करना पड़ा। मौके पर कई दमकल गाड़ियां पहुंचीं, लेकिन केमिकल और लगातार फैलती आग के कारण काबू पाना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। आग रातभर जलती रही और सुबह तक भी पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति बंद करनी पड़ी। घर छोड़कर बाहर निकले लोग घंटों तक सड़कों पर बैठे रहे—भूखे, प्यासे और दहशत में।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिहायशी इलाके में इतने बड़े पैमाने पर स्क्रैप गोदाम आखिर कैसे चल रहे थे?
क्या ये गोदाम वैध थे या अवैध?
अगर अवैध थे, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या इसमें प्रशासन और नगर पालिका की लापरवाही या मिलीभगत शामिल है?
स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों ने मांग की है कि सभी स्क्रैप गोदामों की तत्काल जांच हो, अवैध गोदामों को सील किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों व गोदाम मालिकों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
गनीमत रही कि इस भीषण हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। लेकिन अगर आग आसपास के घरों तक फैल जाती, तो बड़ा नुकसान हो सकता था।
वापी की यह घटना सिर्फ एक आग नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी विफलता को उजागर करती है। अगर अब भी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो अगली बार यह आग किसी की जान भी ले सकती है।